Mamta बहुत झूठ बोलती हैं क्या

सामान्यतः अपने आक्रामक रूप रूप के लिए जाने जाने वाली ममता बनर्जी इस बार अपनी चुनाव प्रचार में बहुत डिफेंसिव नजर आ रही हैं। ज्यादातर वो भारतीय जनता पार्टी के आक्रमणों का जवाब देती हुई नजर आ रही हैं। और ऐसे मुद्दों को लेकर के आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं जो सामान्य तौर पर उनको कोई चुनावी फायदा देते हुए नहीं दे नजर आ रहे हैं या नुकसान करते हुए नजर आ रहे हैं। अब चाहे प्रधानमंत्री का किसी झालमोड़ी की दुकान पर जाकर के झालमोड़ी खाना और उसके बाद उसको स्टेज मैनेज करना और बताना कि ये नहीं पहले से ही था और ये जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे लोग हैं उन्हीं का एक हिस्सा था या प्रधानमंत्री को चॉइससेस ऑफ अब्यूसेस जो बंग में गालियां देना हो बंगाली भाषा में वो करना हो या एसआईआर और इस तरह की चीजें लेकर के चुनाव मैदान में आना। कुल मिलाकर के ममता बनर्जी लगातार यह विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रही हैं। बताने की कोशिश कर रही हैं कि केंद्र सरकार उन पर लगातार उनको परेशान करने की कोशिश कर रहा है। हर चुनाव में उल्टा होता था कि भारतीय जनता पार्टी या बाकी लोग ममता बनर्जी से परेशान होकर डिफेंसिव बात करते थे।माना यही जा रहा है कि ममता बनर्जी की क्रेडिबिलिटी या यह कहिए कि वह लगातार इतनी चीज़ें झूठ बोलती रही हैं या मिसगाइड करती रही हैं या इमोशनली अपने आप को वहां खड़ा करके उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करती रही हैं कि अब उनकी बात कोई सुनने के लिए नहीं तैयार है। इसलिए वो डिफेंसिव नजर आ रही है। और यही कारण है कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार का चुनाव ममता बनर्जी के लिए निश्चित तौर पर मुश्किल वाला है और वो लगातार मुश्किल में है

 

Bihar —गृह मंत्रालय किसी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहती BJP

बिहार के मुख्यमंत्री दिल्ली होकर के गए हैं और सबको मालूम है कि दिल्ली क्यों होकर के गए हैं। अभी सिर्फ दो लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली है। मुख्यमंत्री और दो जेडीयू के नेता उप मुख्यमंत्री के तौर पर होंगे। बाकी पूरा का पूरा मुख्यमंत्री पूरा का पूरा मंत्रिमंडल सम्राट चौधरी का अभी खाली पड़ा है। तो इसका मतलब स्पष्ट है कि कोई सहमति नहीं बन पाई है। सहमति नहीं बन पाई है कि किसको कौन सा मंत्रालय मिलेगा। विशेष रूप से टॉप जो मिनिस्ट्रीज है जिसमें गृह मंत्रालय है, वित्त मंत्रालय है, हेल्थ मिनिस्ट्री है, एजुकेशन मिनिस्ट्री है और पीडब्ल्यूडी है। ये सारे चीज महत्वपूर्ण है। इन सब पर फैसला होना है और फैसला पटना में नहीं होगा। फैसला अब दिल्ली में होगा। उसके कई कारण है। एक तो यह कि दिल्ली में जो प्रधानमंत्री गृह मंत्री हैं वो अब भारतीय जनता पार्टी के लिए फैसला लेंगे। दूसरा नीतीश कुमार भी अब दिल्ली में है। नीतीश कुमार भी अब पटना से दिल्ली आ गए हैं। तो अब यहीं पर सारे फैसले होंगे। मुख्यमंत्री यहीं आएंगे और ना केवल मंत्रिमंडल का बल्कि बहुत सारे प्रशासनिक मसले जो विवादास्पद हो सकते हैं। उन सब पर भी फैसले दिल्ली में ही बैठकर के होंगे। यह तय है और इसीलिए अब बिहार के मुख्यमंत्री का दिल्ली का दौरा काफी ज्यादा होगा। इस तरह की संभावनाएं बताई जा रही हैं। अब निश्चित तौर पर सबसे बड़ी प्राथमिकता या सबसे पहली जरूरत वो है कि बिहार सरकार का मंत्रिमंडल का गठन हो और उस गठन के लिए चर्चा होगी। चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हो गृह मंत्रालय को लेकर के सबसे ज्यादा वो है हमेशा मुख्यमंत्री के पास गृह मंत्रालय हुआ करता था। लेकिन जब नीतीश कुमार ने इस बार शपथ ली थी तो गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी के पास आ गया था। अब इस तरह की मांग हो सकती है कि वो गृह मंत्रालय उप मुख्यमंत्री को दे दिया जाए। लेकिन क्या बीजेपी इस पर सहमत होगी। इसलिए कि बीजेपी किसी भी कीमत पर गृह मंत्रालय नहीं छोड़ना चाहती। गृह मंत्रालय से जुड़े बहुत सारे मसले हैं जो भारतीय जनता पार्टीको आगे की उसकी रणनीति में काफी मददगार हो सकते हैं। इसलिए इस पर सहमति बनाई जाएगी और बीजेपी कोशिश करेगी कि वो इसको अपने पास रखें।

 

दीया ना जले इसके लिए करोड़ों खर्च


तमिलनाडु के दक्षिण के मंदिर विशेष रूप से तमिलनाडु के मंदिर रिच है इसलिए कि वहां बहुत रिच है इसलिए कि वहां पर सोना चांदी बहुत सारा दान किया जाता है। पैसे भी दान किए जाते हैं। उन परिस्थिति में सरकार बहुत सारा टैक्स के रूप में और बहुत सारा चोरी छुपे मंदिरों की धन संपत्ति का इस्तेमाल गैर धार्मिक चीजों में करती है। इसको लेकर के विरोध भी चल रहा है। कोर्ट में मुकदमा भी है। अब ये जो मामला निकल कर के आया है कि लगभग डेढ़ से दो करोड़ खर्च हुए हैं इस पूरे आंदोलन को या पूरी प्रक्रिया को रोकने के लिए उसको लेकर के बहुत नाराजगी है लोगों में और क्या इसका प्रभाव चुनाव में होगा? ऐसा लगता है कि चुनाव में प्रभाव ज़रूर होगा और लोगों की राजगी रिफ्लेक्ट करेगी और यह हिंदुओं के खिलाफ जिस तरह का कैंपेन डीएमके का चला था उससे पहले से ही लोगों में नाराजगी थी। तो ये जो मामला है सरकारी खजाने का जो पैसे खर्च हुए हैं ये चुनावी मुद्दा बन गया है

बांग्लादेश में पुजारी की हत्या क्या बंगाल चुनाव पर पड़ेगा असर

बांग्लादेश के एक पुजारी जो पिछले तीन-चार दिन से गायब हुए थे और उनके गायब होने की शिकायत दर्ज की गई थी। अब उनका शव एक पेड़ से लटकता हुआ मिला है। निश्चित तौर पर ना केवल दुखद है बल्कि काफी चिंता वाली बात है कि किस तरह से वहां पर लगातार हिंदू पुजारियों के साथ इस तरह की घटनाएं घटित हो रही है। तीन दिन पहले जब वह लापता हुए थे तो उनकी शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। पहले ये मामला चलता था जब यूनुस सरकार थी तब लेकिन यूनुस सरकार के जाने के बाद ये पहली घटना है। लेकिन ये घटना भी क्यों घटित हुई इसको लेकर केनिश्चित तौर पर चिंता और चर्चा दोनों है। यह घटना कॉक्स बाजार इलाके में हुई घटित हुई थी। जब इनके गले में स्कार्फ लपेटे एक पेड़ से शव लटकता हुआ मिला था। वहां के जो पुलिस के जो इंचार्ज हैं मोहम्मद शमीद्दीन बताया कि लगभग दोपहर में शव लिखा था और जो पुजारी है उनका नाम नयन दास है 20 अप्रैल को ही इस मामले में रिपोर्टदर्ज कराई गई थी और उसके बाद अब यह घटना सामने आई है कि उनकी मौत हो गई है। अब ये तो जिस तरह से मामला निकल कर के आया है उससे ये साफ है कि ये आत्महत्या तो नहीं है हत्या की गई है उनकी लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद ही पता लगेगा इस तरह की घटनाएं सामान्य है बांग्लादेश में जहां हिंदुओं की हिंदुओं हिंदू पुजारियों की हिंदू मंदिरों पर लूट सामान्य थे यूनुस सरकार के जाने के बाद इसमें थोड़ी सी कमी आई है। डिप्लोमेटिक संबंध भी बहाल हुए हैं और और ऐसा लगता है कि इस मामले में भारत सरकार सख्ती से बांग्लादेश सरकार को मैसेज देगी और इन सब का बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल के चुनाव पर भी नजर आएगा। काफी दिनों से इस बात को लेकर के भी नाराजगी थी। जिस तरह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री जो वहां की पुरानी सरकार थी उसके समर्थन में या वहां जिस तरह की घटनाएं होती थी उस पर चुप्पी थी तो निश्चित तौर पर इसका प्रभाव दिखेगा इसलिए कि बहुत सारे बांग्लादेशी घुसपैठिए भी भारत में हैं और वो बांग्लादेश में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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