15 से 17 जून के बीच सामना होगा एक बार फिर मोदी और ट्रंप का, बहुत सी निगाहें इस मीटिंग पर टिकी हुई हैं, दूसरी तरफ आज दुनिया भर में बहुत सारे डेवलपमेंट हो रहे हैं और खासतौर पर अमेरिका, चाइना और पाकिस्तान के बीच बहुत कुछ चल रहा है और इन सब के बीच जी 7 की होंने वाली है, जहां मोदी और ट्रंप में आमने सामने होंगे, जिस तरह से पिछले कुछ समय से ट्रंप बहुत बार अगेंस्ट बोले है इंडिया के, उसके बाद ये मुलाकात है , क्या होगा इस मुलाकात में, इसके साथ चीन में ट्रंप के बाद पुतिन का दौरा, क्या चल रहा है अंदर ही अंदर , तमाम बातों पर चर्चा की है Former Major General P K Sehgal के साथ….
Ques— क्या लगता है जब इन तमाम तल्लिखयों के बीच मोदी और ट्रंप मिलने वाले हैं?

Ans— प्रधानमंत्री मोदी मिलेंगे और वो दिस टाइम एस एन इक्वल एंड सबनेट के रूप में मिलेंगे और वो साफ तौर पर बताएंगे कि हिंदुस्तान हर फैसला लेगा जो उसके हित में है ना कि जो अमेरिका के हित में हिंदुस्तान रशिया से ऑयल खरीदा जाएगा हिंदुस्तान रशिया से हथियार खरीदा जाएगा क्योंकि जो उसको अपनी सिक्योरिटी के लिए और अपनी पब्लिक हालात को सुधारने के लिए है उसके कोई कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा फिर ट्रंप की तरफ से बहुत बड़े पैमाने पर बयानबाजी हुई है लेकिन जहां तक हिंदुस्तान बातचीत करेगा, अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के ऊपर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऊपर सेमीकंडक्टर्स के ऊपर फिर इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के ऊपर। फिर हम हम चाहेंगे कि अमेरिका को ज्यादा से ज्यादा गैस खरीदे ताकि हमारी एनर्जी सिक्योरिटी कायम रहे। हिंदुस्तान अपने हित को कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा और दूसरा जो है ट्रंप ने काफी ज्यादा मुश्किल खड़ी कर दी है हिंदुस्तान के डस्पोरा के लिए हिंदुस्तान के स्टूडेंट्स के लिए वीजा के लिए और दूसरे वीजा के लिए खास करके जो वहां पे अपनी एजुकेशन के बाद में खूब खर्चा करके जैसे पड़ रही है तीन साढ़ तीन करोड़ खर्चा होगा उसके की उनको वहां नौकरी नहीं मिलेगी। इन तमाम मुद्दों के ऊपर बातचीत करेंगे।
Ques— इन सबके बीच आपको लगता है कि क्या कुछ बातें ईरान युद्ध चल रहा है इसको लेकर के कुछ होंगी और जो क्राइसिस पूरी दुनिया में है तेल को लेकर के और लोगों की निगाहें हैं इस समिट पर क्योंकि बड़े-बड़े नेता आपस में मिल रहे हैं इसका कोई रिजल्ट सामने आएगा ?
Ans— इस समय सारी दुनिया बड़ी प्रभावित है स्टेट ऑफ हार्मूज को लेकर, अमेरिका खुद भी इससे बड़ा प्रभावित हो रहा है, ट्रंप की उसके अपने सरकार इसके खिलाफ है, हाल में अमेरिका के सेनेट में एक रेसोल्यूशन पास हुआ है अगेंस्ट वॉर उसमें पहली बारी है चार ट्रंप के जो सपोर्टर्स है रिपब्लिक है उन्होंने ट्रंप के खिलाफ वोटिंग दी है और तीन ने वोटिंग से अपने को दूर रखा है सेवन ऑफिस रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ हो गए है , साफ तौर पे डोनल्ड ट्रंप को नजर आ रहा है कि डिप्लोमेसी वुड बी बेटर क्योंकि अगर दोबारा जंग स्टार्ट करते हैं पोलिटिकली एंड इकोनमिक कॉस्ट टू दूसरा पूरी दुनिया जो है उसके खिलाफ है ट्रंप के अपने एलआई उसके खिलाफ है और जहां तक सऊदी अरेबिया है , यूएई , कतर और बाकी जीसीसी कंट्रीज है उन्होंने साफ तौर पे कहा है कि अगर जंग दोबारा होती है तो उसका नुकसान जीसी कंट्रीज होगा उनकी जबरदस्त तबाही होगी अपनी तबाही को चेकमेट करने के लिए उन्होंने साफ तौर पे तो हमको कह दिया कि हम किसी प्रकार से अमेरिका को एयर बेससेस का इस्तेमाल नहीं करने देंगे अपने देश के ऊपर से जिससे अमेरिका के लिए और के लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
Ques— ट्रंप की रीसेंट विजिट चाइना को लेकर के जो है और लोग की काफी बातें हो रही है कि ट्रंप चाइना गए उनका बहुत बड़ा स्वागत हुआ। कहने को दोनों देश बहुत बड़े दुश्मन है। ट्रंप चले गए तो तुरंत वहां पुतिन पहुंचते हैं। तो इन तीनों देशों के बीच आपको लगता है कि चाइना का क्या रोल है? क्या खेल वो कर रहा है कि एक तरफ ट्रंप को भी बुला रहा है, एक तरफ पुतिन को भी बुला रहा है ?

Ans— साफ तौर पj दर्शा रहा है कि चाइना जो है एक किस्म से अमेरिका का इक्वल निक उभर के आ रहा है और जहां तक पुतिन का तालुक है चीन साफ तौर पर पुतिन को जूनियर पार्टनर की तरफ से देख रहे हैं। ना के ना के बराबरी से एक दूसरे में चाइना का जो रोल है उसकी बढ़ गई है। जिंगपिंग का कद बढ़ गया है। उन्होंने साफ तौर पे ट्रंप को भी कहा है कि हम आपके इक्वल है ना कि आपके सबोर्डिनेट और जो भी बात होगी वो एज ए इक्वल होगी।
Ques — चाइना क्या बड़ा खेल कर रहा है, एक तरफ अमेरिका से भी वो बना के रख रहा है क्योंकि उसको सुपर पावर बनना है और दूसरी तरफ पुतिन यानी रशिया से भी वो अपने संबंध नहीं बिगाड़ रहा है ?
Ans— इसमें कोई दो राय नहीं है। इस समय जो लड़ाई हो रही है चाहे रशिया और दूसरा अमेरिका और ईरान और इजराइल की इसमें सबसे बड़ा जो गेनर और विनर है वो चाइना है और वो बहुत ही चालाकी से दोंनों देशों से अपने संबंध बना के रखा रहा है क्योंकि उसमें उसका फायदा है।
Ques— युद्द में पाकिस्तान भी कूद रहा है हाल ही में अपनी सेना साउदी भेजी, पर अपने घर में कंगाल है , क्या मकसद है?
Ans—-ईरान को ना तो चाइना ना ही पाकिस्तान के ऊपर भरोसा है ना अमेरिका के ऊपर भरोसा है और साफ तौर पे अमेरिका को नजर आ रहा है कि पाकिस्तान जो है डबल रोल प्ले कर रहा है। ईरान को भी समझ आ रहा है कि डबल रोल प्ले कर रहा है। एक तो अमेरिका ने स्टेट ऑफ को ब्लॉकेट कर दिया है। लेकिन पाकिस्तान के माध्यम से उन्होंने छह सात रस्ते खोल दिए। पाकिस्तान के माध्यम से चाइना के पास ऑल पाइप में ऑयल जा रहा है। गैस जा रहा है। बाकी सामग्री जा रही है, इससे ट्रंप की पाबंदी का उतना असर नहीं पड़ रहा ईरान के ऊपर जितना पड़ना चाहिए। दूसरा साथ सऊदी अरेबिया से कर लिया, उन्होंने एक स्पोर्ट भेज दिए 8000 सैनिक, यानी अगर कल ईरान सऊदी के ऊपर हमला करता है जो अवश्य करेगा अगरअमेरिका ने हमला किया हमला किया तो जी तो डिफेंस फैक्ट के मुताबिक पाकिस्तान को ईरान के ऊपर हमला करना पड़ेगा और किसी प्रकार से नहीं करेगा ऐसे में पाकिस्तान अपनी ही एक किस्म से trap में फंस गया, और जहां तक पाकिस्तान के लोग हैं पाकिस्तान के लोग जो है वो किसी प्रकार से नहीं चाहते इस बात के समझते तो की और शबाज शरीफ की काफी ज्यादा निंदा हो रही है और साफ तौर पे कह रहे है की हमारे देश के अंदर तो महंगाई है आप इसको बेरोजगारी को कंट्रोल कीजिए महंगाई को कंट्रोल कीजिए अपना हेल्थ केयर बढ़ाइए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाइए मेडिसिन नहीं है खाने की चीज़ नहीं है भूख जबरदस्त है इनकी तरफ नजर कीजिए बजाय बाहर सैनिक भेजने के।
Ques— पाकिस्तान की हाल ही में बिलकुल नई स्टेटमेंट आई है कि तालिबान, भारत के हाथ का खिलौना है मतलब तालिबान जो कर रहा है और तालीबान जो करना चाहता है वो भारत के कहने पर करना चाह रहा है। कभी तो एक तरह से बहुत जबरदस्त दोस्ती थी पाकिस्तान और तालिबान में। अब एक दूसरे के दुश्मन बने हैं और भारत को बीच में इनवॉल्व कर रहे हैं। तो यहां को क्या ट्रिक है ये पाकिस्तान की भारत को इन्वॉल्व कर रहा है ?
Ans— पाकिस्तान को साफ तौर पे नजर आता है कि जो उनका खेल था बहुत बड़े पैमाने पर वो खेल जो है विफल हो गया है। उन्होंने हर प्रकार से तालबान की मदद की अमेरिका पर भरोसा करने के लिए। लेकिन जब तालबान वहां आ गया तो शुरू से इस पर आता है कि तालबान ने कहा की पहले तो हम लाइन को नहीं एक्सेप्ट करते फिर पाकिस्तान के खिलाफ जो टीटीपी कारवाई कर रही थी जी जो बीएलएस कारवाई कर रही थी उसको इनडायरेक्टली सपोर्ट करना शुरू किया फिर उन्होंने डायरेक्टली सपोर्ट करना शुरू किया बड़े पैमाने पर पाकिस्तान के अंदर कई प्रकार के ऑपरेशन चले टीटीपी के माध्यम से बलचिस्तानी के माध्यम से और पाकिस्तान ने उसके इसके ऊपर हवाई हमले किए और अभी पाकिस्तान साफ तौर पे जानता है कि हिंदुस्तान और अफगानिस्तान का रिलेशन जहां वहां पे अफगानिस्तान में तालबान सरकार है उनके आपस में बहुत अच्छे है हिंदुस्तान हर प्रकार से तालबान की मदद कर रहा है हर प्रकार से उनको खा लिया उनको हमने 500 टन गेहूं गेहूं दिया उनको मेडिसिन दी है उधर कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बना रहे है और तालिबान के या अफगानिस्तान के सरकार के जो विदेश मंत्री है वो भी हिंदुस्तान में हिंदुस्तान फॉर्मली रेग्नाइजमेंट तो नहीं किया लेकिन अब सुब बहुत इम्रूव हो चुके हैं जो पाकिस्तान को अच्छा नहीं लग रहा है।
