सोनम वांगचुक का अनशन खत्म आंदोलन में शामिल आसामिजक तत्वों को झटका
सोनम वांगचुक का भूख अनशन खत्म करने से लग रहा है कि इतने दिनों से छात्रों और सरकार के बीच चल रही टकराव का कुछ अंत जरूर निकलेगा, और निकलना भी चाहिए क्योंकि तमाम चल रहे वीडियो को देखकर चिंता इस बात को लेकर की जा रही है कि अब ये छात्रों का आंदोलन ना रहकर , गुंड़ों , असामाजिक तत्वों का मंच बनता जा रहा है जो छात्रों की आड़ में देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, पता चला है कि देर रात सोनम वांगचुक ने हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद फैसल अपना 26 दिनों का अनशन खत्म किया , इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे, उधर, जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में देर रात भीड़ जुटी रही और नारेबाजी का दौर चलता रहा। वांगचुक ने इसके बारे में एक्स पोस्ट पर जानकारी दी, उन्होंने लिखा कि पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मिलने या पत्र पर हस्ताक्षर करके मुझे उपवास तोड़ने के लिए कहा था और वो देश में संभावित हिंसा को देखते हुए चिंतिंत हैं। वांगचुक ने यह भी अपील की कि हिंसा को कहीं भी न होने दें। वहीं दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन देश के युवाओं का है और यह सिर्फ सोनम वांगचुक या दिपके तक सीमित नहीं है। यह विरोध प्रदर्शन देश के युवाओं का है, विपक्षी दलों का नहीं। और वो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर ही यहां से उठेंगे। वैसे पता चला है कि सरकार भी प्रदर्शनकारियों से किसी न्यूट्रल जगह पर बातचीत करने के लिए सहमत हो गई है।
क्या यह पोस्ट बना सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म करने का कारण
फिल्म अभिनेत्री सेलिना जेटली अचानक चर्चा का विषय बनी हुई हैं और उसके पीछा उनका एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने ने जन्तर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बारे में लिखा है कि कलम हमेशा तलवार से ज्यादा ताकतवर होती है। हमारे देश के भविष्य पर बातचीत होनी चाहिए टकराव नहीं। इस पोस्ट को कांग्रेस के कद्दावर नेता नेता शशि थरूर ने री-पोस्ट करके और ज्यादा वायरल कर दिया है और चर्चा ये भी चल निकली है कि इस पोस्ट के आने के बाद , गुरुवार रात ही सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया। सेलिना ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि देश की शिक्षा व्यवस्था के सामने जो चुनौतियां हैं, वे न तो कल शुरू हुईं और न ही किसी एक सरकार या राजनीतिक पार्टी की वजह से हैं। ये दशकों से चली आ रही हैं। अब एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाने का समय आ गया है जहां हर बच्चे को सफल होने का बराबर मौका मिले।’सेलिना जेटली ने लिखा कि किसी छात्र को जब मौका मिलता है, तो दुनिया को डॉ. टेसी थॉमस, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम या सुंदर पिचाई जैसा कोई अग्रणी, इनोवेटर, वैज्ञानिक, नेता या दूरदर्शी व्यक्ति मिलता है। लेकिन कितने ही असाधारण युवा दिमाग कभी सामने नहीं आ पाते क्योंकि उन तक मौका ही नहीं पहुंच पाता? उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध तब होता है जब बातचीत नाकाम हो जाती है। लेकिन बड़ी-बड़ी लड़ाइयां भी आखिर में बातचीत से ही खत्म होती हैं।
