West bengal -कांग्रेस ने दिखाया ममता बनर्जी को असलियत का आईना

एक कहावत है जैसी करनी वैसी भरनी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री यानी दीदी पर आजकल ये कहावत बिल्कुल ठीक बैठ रही है, जी हां याद कीजिए वो समय जब खुद राहुल गांधी ने आगे बढ़कर ममता बनर्जी से साथ चलने और बीजेपी के खिलाफ बंगाल का चुनाव साथ लडने का आग्रह किया था, पर दीदी तो उस समय सातवें आसमान पर बैठी थी और उन्हें लग रहा था कि बंगाल में उन्हें हराने वाला पैदा ही नहीं हुआ है और वो अपने दम पर ही विरोधियों से निपट लेंगी, लेकिन आज दीदी धरातल पर गिरी हुई हैं और चाह रही है कि बीजेपी का सामना करने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो जाएं, पर , विपक्षी दलों ने उनकी अपील पर जितनी कड़ी और कड़वी प्रतिक्रिया दे डाली है, खासतौर पर Congress और CPM ने जिन्होंने सीधे तौर पर ममता से हाथ मिलाने को मना कर दिया बल्कि बुरी तरह से उऩ्हें लताड़ भी दिया , सीपीएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने सीधे बनर्जी की पहचान, अपराधी, लुटेरी, भ्रष्ट’ नेता के रूप में कर डाली और बीजेपी के खिलाफ ममता के साथ मिलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, वहीं पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के पार्टी प्रवक्ता सौम्या रॉय ने कहा, हमें अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय दलों को आमंत्रित कर रही हैं, उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कह दिया कि क्या आप माओवादियों की बात कर रही हैं, जिन्होंने 25 मई, 2013 को 18 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी? वहीं वहीं लोकसभा में कांग्रेस के पूर्व नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह तक कह दिया कि बंगाल में कांग्रेस और सेक्युलर दलों को मिटाने की भरपूर कोशिशें कीं और अब उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है , आपको बता दें कि टीएमसी पर आरोप है कि 2011 में सत्ता में आने के बाद से उसने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के कई दफ्तरों को या तो बंद करवा दिया या उनपर अवैध कब्जा जमा लिया था, बीजेपी के सता में आते ही ये खुल गए हैं।

 

Congress मुक्त देश या BJP के 6 मुख्यमंत्री बाहर से

बंगाल की जीत के बाद बीजेपी देश के वो पार्टी बन गई है जो इस समय देश के 22 राज्यों में सरकार चला रही है, इनमें से कुछ राज्यों में गठबंधन की सरकारें हैं पर केंद्र में काबिज होंने के कारण यहां भी BJP का ही बोलबाला रहता है, पर कम हो लोग ये जानते होंगे कि 22 में से 6 राज्य ऐसे हैं के मुख्यमंत्री वो नेता बने हुए हैं जो जो कांग्रेस या कोई और क्षेत्रीय दलों को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और यहां आकर अपनी इतनी धाक बना ली कि बीजेपी आलाकमान के भी प्यारे बन गए, अब शुरूआत पश्चिम बंगाल से ही करते हैं जहां के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 2020 तक tmc में थे ममता के सगे थे पर जब बीजेपी में आए तो उनके भी सगे हो गए , फिर बात करें असम के मुख्यमंक्षी हिमंता बिस्वा सरमा की जिन्होंने 2015 में कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी का पकड़ा और बीजेपी ने भी उनपर भरोसा दिखाते हुए तीसरी बार मुख्यंमत्री का पद सौंप दिया। , वैसे कम ही लोग ये जानते होंगे कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी 2017 में लालू यादव की पार्टी rjd छोड़कर बीजेपी में आए और ऐसा रंग जमाया कि cm की कुर्सी पर बैठ गए। इसके बाद है। मणिपुर के cm युमनाम खेमचंद सिंह भी 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। हाल ही में BJP सरकार में पहली बार मुख्यमंत्री बनाए गए। इसी प्रकार त्रिपुरा में सीएम मणिक साहा ने भी साल 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और साल 2022 में भाजपा ने बिप्लव देब के इस्तीफे के बाद मणिक साहा को त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बनाया था। पेमा खंडू जो अरूणाचल प्रदेश के cm हैं वो भी 2016 में कांग्रेस छोड़कर आए, उन्हें पहली बार में ही भाजपा ने 2016 में अरुणाचल का सीएम बनाया था। साल 2019 में दूसरी और 2024 में वो ही CM हैं। माना यही जाता है कि इन नेताओं की जनता में जबरदस्त पैठ और काबिलियत को देखकर ही बीजेपी में उन्हें cm पद का सम्मान मिला है। और बीजेपी ना केवल पार्टी लाइन के पुराने व जनाधार वाले नेताओं को प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपती है बल्कि कांग्रेस मुक्त भारत को बढ़ावा देने के लिए भी अन्य दलों से आए जनाधार वाले नेताओं को भी अपनाती है.

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